श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 700
 
 
श्लोक  3.5.700 
অন্য অবতারে কেহ ঝাট নাহি পায
নিরবধি নিত্যানন্দ ’চৈতন্য’ লওযায
अन्य अवतारे केह झाट नाहि पाय
निरवधि नित्यानन्द ’चैतन्य’ लओयाय
 
 
अनुवाद
अन्य अवतारों में भगवान की शरण आसानी से प्राप्त नहीं होती थी, लेकिन नित्यानन्द ने हमेशा सभी को भगवान चैतन्य की शरण में आने के लिए प्रेरित किया।
 
In other incarnations, surrender to the Lord was not easily attained, but Nityananda always inspired everyone to surrender to Lord Chaitanya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)