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श्लोक 3.5.70  |
অদ্যাপিহ শ্রীবাসেরে চৈতন্য-কৃপায
দ্বারে সব উপসন্ন হৈতেছে লীলায |
अद्यापिह श्रीवासेरे चैतन्य-कृपाय
द्वारे सब उपसन्न हैतेछे लीलाय |
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| अनुवाद |
| भगवान चैतन्य की कृपा से आज भी सब कुछ श्रीवास के द्वार पर आता है। |
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| By the grace of Lord Chaitanya, even today everything comes to the door of Srivasa. |
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