श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 694
 
 
श्लोक  3.5.694 
নিত্যানন্দ প্রভুবর—করুণা-সাগর
পাদ-পদ্ম দিলা তার মস্তক-উপর
नित्यानन्द प्रभुवर—करुणा-सागर
पाद-पद्म दिला तार मस्तक-उपर
 
 
अनुवाद
तब दया के सागर नित्यानंद प्रभु ने उस ब्राह्मण के सिर पर अपने चरणकमल रख दिए।
 
Then Nityananda Prabhu, the ocean of mercy, placed his lotus feet on the head of that Brahmin.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)