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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 689
श्लोक
3.5.689
এত বলি’ আপন-গলায মালা আনি’
তুষ্ট হৈ’ ব্রাহ্মণেরে দিলেন আপনি
एत बलि’ आपन-गलाय माला आनि’
तुष्ट है’ ब्राह्मणेरे दिलेन आपनि
अनुवाद
ये शब्द कहकर नित्यानंद ने अपने गले से माला उतार ली और प्रसन्नतापूर्वक ब्राह्मण को दे दी।
Saying these words, Nityananda took off the garland from his neck and happily gave it to the Brahmin.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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