श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 683
 
 
श्लोक  3.5.683 
নহিলে এ-মত কৃপা করিবেন কেনে
এ প্রকাশ অন্যে কি দেখযে ভৃত্য বিনে
नहिले ए-मत कृपा करिबेन केने
ए प्रकाश अन्ये कि देखये भृत्य विने
 
 
अनुवाद
"वरना वह तुम पर ऐसी दया क्यों करता? उसके सेवक के अलावा और कौन ऐसा ऐश्वर्य देख सकता है?"
 
"Why else would he show you such kindness? Who else but his servant could see such opulence?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)