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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 674
श्लोक
3.5.674
হৈল সবার তবে চক্ষু-বিমোচন
হেন মহাপ্রভু তুমি পতিত-পাবন
हैल सबार तबे चक्षु-विमोचन
हेन महाप्रभु तुमि पतित-पावन
अनुवाद
"तब हमारी दृष्टि पुनः लौट आई। हे पतितों के उद्धारक, आपकी महानता ऐसी है!
"Then our sight was restored. O Redeemer of the fallen, such is your greatness!
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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