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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 671
श्लोक
3.5.671
কাঙ্টা জোঙ্ক পোক ঝড বৃষ্টি শিলাঘাতে
সবে মরি, কারো শক্তি নাহিক যাইতে
काङ्टा जोङ्क पोक झड वृष्टि शिलाघाते
सबे मरि, कारो शक्ति नाहिक याइते
अनुवाद
"हमें काँटों, जोंकों, कीड़ों, तूफ़ान और ओलों से बहुत तकलीफ़ हुई। इस तरह से पीड़ित होने के कारण, हममें घर लौटने की भी ताकत नहीं बची थी।
"We suffered terribly from thorns, leeches, insects, storms, and hail. Suffering like this, we didn't even have the strength to return home.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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