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श्लोक 3.5.670  |
বাডিতে প্রবিষ্ট হৈ’ সব দস্যু-গণে
অন্ধ হৈ’ সবে পডিলাঙ নানা-স্থানে |
बाडिते प्रविष्ट है’ सब दस्यु-गणे
अन्ध है’ सबे पडिलाङ नाना-स्थाने |
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| अनुवाद |
| “जब मैं अपने डाकुओं के साथ घर के आंगन में दाखिल हुआ तो हम सबकी दृष्टि चली गई और हम विभिन्न स्थानों पर गिर पड़े। |
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| “When I entered the courtyard of the house with my bandits, we all lost our sight and fell at different places. |
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