श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 668
 
 
श्लोक  3.5.668 
’কার পদাতিক আসিযাছে কোথা হৈতে’
এত ভাবি’ সে-দিন গেলাঙ সেই-মতে
’कार पदातिक आसियाछे कोथा हैते’
एत भावि’ से-दिन गेलाङ सेइ-मते
 
 
अनुवाद
"हमने सोचा कि सैनिक कहीं और से आए होंगे। ऐसा सोचकर हम उस रात घर लौट आए।"
 
"We thought the soldiers might have come from somewhere else. Thinking so, we returned home that night."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)