श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 666
 
 
श्लोक  3.5.666 
নিরবধি হরি-ধ্বনি সবার বদনে
তুমি আছ গৃহ-মাঝে আনন্দে শযনে
निरवधि हरि-ध्वनि सबार वदने
तुमि आछ गृह-माझे आनन्दे शयने
 
 
अनुवाद
“जब आप घर के अन्दर आनन्दपूर्वक सो रहे थे, तब वे सभी निरन्तर हरि का नाम जप रहे थे।
 
“While you were sleeping happily inside the house, they were all continuously chanting the name of Hari.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)