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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 661
श्लोक
3.5.661
এক দিন সাজি’ বহু লৈ’ দস্যু-গণ
হরিতে আইলু মুঞি শ্রী-অঙ্গের ধন
एक दिन साजि’ बहु लै’ दस्यु-गण
हरिते आइलु मुञि श्री-अङ्गेर धन
अनुवाद
“एक दिन मैं आपके दिव्य शरीर से आभूषण चुराने के लिए सशस्त्र डाकुओं का एक दल लेकर आया।
“One day I brought a group of armed bandits to steal the ornaments from your divine body.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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