श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 659
 
 
श्लोक  3.5.659 
মোরে দেখি’ সর্ব নবদ্বীপ কাঙ্পে ডরে
কিবা পাপ নাহি হয আমার শরীরে
मोरे देखि’ सर्व नवद्वीप काङ्पे डरे
किबा पाप नाहि हय आमार शरीरे
 
 
अनुवाद
"नवद्वीप के लोग मुझे देखकर भय से काँप उठते हैं। ऐसा कोई पाप नहीं है जो मैंने न किया हो।
 
"The people of Navadvipa tremble with fear at the sight of me. There is no sin that I have not committed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)