श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 655
 
 
श्लोक  3.5.655 
গডাগডি’ যায পডি’ সকল অঙ্গনে
হাসে, কান্দে নাচে, গায আপনা-আপনে
गडागडि’ याय पडि’ सकल अङ्गने
हासे, कान्दे नाचे, गाय आपना-आपने
 
 
अनुवाद
वह पूरे आँगन में ज़मीन पर लोटता रहा। वह सहज ही हँसा, रोया, नाचा और गाया।
 
He rolled around on the ground all over the courtyard, laughing, crying, dancing, and singing with ease.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)