श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 654
 
 
श्लोक  3.5.654 
শুনিযা প্রভুর বাক্য সুকৃতি ব্রাহ্মণ
কহিতে না পারে কিছু, করযে ক্রন্দন
शुनिया प्रभुर वाक्य सुकृति ब्राह्मण
कहिते ना पारे किछु, करये क्रन्दन
 
 
अनुवाद
भगवान के वचन सुनकर वह भाग्यशाली ब्राह्मण बोल न सका, बल्कि रोता रहा।
 
Hearing the words of God, that fortunate Brahmin could not speak, but kept crying.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)