श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  3.5.65 
অদ্বৈতেরে তোমারে আমার এই বর
’জরা-গ্রস্ত নহিবে দোঙ্হার কলেবর’”
अद्वैतेरे तोमारे आमार एइ वर
’जरा-ग्रस्त नहिबे दोङ्हार कलेवर’”
 
 
अनुवाद
“अद्वैत और आपको मेरा आशीर्वाद है कि आपके शरीर पर कभी भी बुढ़ापे का प्रभाव नहीं पड़ेगा।”
 
“Advaita and you have my blessings that old age will never affect your bodies.”
तात्पर्य
श्री महाप्रभु ने यह वरदान दिया कि श्रीवास और श्री अध्वैत प्रभु के पारलौकिक शरीरों पर वृद्धावस्था का कभी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)