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श्लोक 3.5.642  |
চতুর্-দিকে ভক্ত-গণ করে হরি-ধ্বনি
আনন্দে হুঙ্কার করে অবধূত-মণি |
चतुर्-दिके भक्त-गण करे हरि-ध्वनि
आनन्दे हुङ्कार करे अवधूत-मणि |
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| अनुवाद |
| चारों दिशाओं में भक्तजन हरि नाम का कीर्तन कर रहे थे और अवधूतों के शिरोमणि परमानंद में गर्जना कर रहे थे। |
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| Devotees in all directions were chanting the name of Hari and the chief of the Avadhoots was roaring in ecstasy. |
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