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श्लोक 3.5.640  |
দস্যু-সেনাপতি দ্বিজ কান্দিতে কান্দিতে
নিত্যানন্দ-চরণে আইলা সেই মতে |
दस्यु-सेनापति द्विज कान्दिते कान्दिते
नित्यानन्द-चरणे आइला सेइ मते |
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| अनुवाद |
| तब डाकुओं का सरदार ब्राह्मण रोता हुआ नित्यानंद के चरणकमलों के पास आया। |
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| Then the Brahmin, the leader of the bandits, came crying to the lotus feet of Nityananda. |
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