श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 637
 
 
श्लोक  3.5.637 
নিত্যানন্দ-স্বরূপের শরণ-প্রভাবে
ঝড-বৃষ্টি আর কার দেহে নাহি লাগে
नित्यानन्द-स्वरूपेर शरण-प्रभावे
झड-वृष्टि आर कार देहे नाहि लागे
 
 
अनुवाद
नित्यानन्द स्वरूप की शरणागति के प्रभाव से वे तूफानी वर्षा से उत्पन्न कष्ट से मुक्त हो गये।
 
By surrendering to the form of Nityananda, he was relieved of the suffering caused by the torrential rain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)