vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
»
श्लोक 634
श्लोक
3.5.634
জন্ম জন্ম প্রভু তুমি, মুঞি তোর দাস
কিবা জীঙ মরোঙ্ এই হৌ মোর আশ”
जन्म जन्म प्रभु तुमि, मुञि तोर दास
किबा जीङ मरोङ् एइ हौ मोर आश”
अनुवाद
"जन्म-जन्मान्तर तक आप ही मेरे स्वामी हैं और मैं आपका दास हूँ। मैं जीऊँ या मरूँ, मेरी और कोई इच्छा नहीं।"
"You are my master for all my lives and I am your slave. Whether I live or die, I have no other desire."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×