श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 627
 
 
श्लोक  3.5.627 
যে জন আছাড প্রভু, পৃথিবীতে খায
পুনশ্ চ পৃথিবী তারে হযেন সহায
ये जन आछाड प्रभु, पृथिवीते खाय
पुनश् च पृथिवी तारे हयेन सहाय
 
 
अनुवाद
“हे प्रभु, यदि कोई व्यक्ति बलपूर्वक जमीन पर गिरता है, तो पृथ्वी उसे पुनः सहारा देती है।
 
“O Lord, if a person falls forcefully on the ground, the earth supports him again.
तात्पर्य
जब कोई व्यक्ति गिरता है, तो धरती उसे और नीचे गिरने नहीं देती, बल्कि उसे सहारा देती है।

ऐसा कहा गया है:

भूमौ स्खलित-पादानां भूमिर एवालम्बनम्

त्वयि जातापराधानां त्वम एव शरणं प्रभो

"जो ठोकर खाकर गिरते हैं, उनके उठने का आधार केवल भूमि है। ठीक उसी प्रकार, हे भगवान, जो लोग आपका अपराध करते हैं, उनके लिए शरण कोई नहीं है सिवाए आपके।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)