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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 625
श्लोक
3.5.625
সে চরণ চিন্তিলে আপদ নাহি আর
সেই-ক্ষণে কোটি অপরাধীর ও নিস্তার
से चरण चिन्तिले आपद नाहि आर
सेइ-क्षणे कोटि अपराधीर ओ निस्तार
अनुवाद
उनके चरणकमलों का ध्यान करने से करोड़ों अपराध करने वाला भी सभी कष्टों से तुरन्त मुक्त हो जाता है।
By meditating on His lotus feet, even a person who has committed millions of crimes is instantly freed from all sufferings.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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