श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 624
 
 
श्लोक  3.5.624 
এত ভাবি’ দ্বিজ নিত্যানন্দের চরণ
চিন্তিযা একান্ত-ভাবে লৈল শরণ
एत भावि’ द्विज नित्यानन्देर चरण
चिन्तिया एकान्त-भावे लैल शरण
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विचार करके ब्राह्मण ने नित्यानंद के चरणकमलों का ध्यान किया और उनकी पूर्ण शरण ली।
 
Thinking thus, the brahmin meditated on the lotus feet of Nityananda and took complete refuge in Him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)