श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 622
 
 
श्लोक  3.5.622 
যোগ্য মুঞি-পাপিষ্ঠের এ সব দুর্গতি
হরিতে প্রভুর ধন যেন কৈলুঙ্ মতি
योग्य मुञि-पापिष्ठेर ए सब दुर्गति
हरिते प्रभुर धन येन कैलुङ् मति
 
 
अनुवाद
“यह कष्ट हम जैसे पापी लोगों के लिए उचित है, क्योंकि हमने प्रभु के धन को लूटने का प्रयास किया था।
 
“This suffering is fitting for sinners like us, because we tried to plunder the Lord's wealth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)