श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 619
 
 
श्लोक  3.5.619 
মনে ভাবে বিপ্র—“নিত্যানন্দ নর নহে
সত্য এহো ঈশ্বর,—মনুষ্য কভু কহে
मने भावे विप्र—“नित्यानन्द नर नहे
सत्य एहो ईश्वर,—मनुष्य कभु कहे
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने सोचा, "नित्यानंद कोई मनुष्य नहीं हैं। वे तो निश्चित रूप से परमेश्वर हैं। वे कोई साधारण मनुष्य नहीं हो सकते।"
 
The brahmin thought, "Nityananda is no human being. He is certainly the Supreme Lord. He cannot be an ordinary human being."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)