श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 615
 
 
श्लोक  3.5.615 
মহাবৃষ্টি দস্যু-গণ ভিজে নিরন্তর
মহা-শীতে সভার কম্পিত কলেবর
महावृष्टि दस्यु-गण भिजे निरन्तर
महा-शीते सभार कम्पित कलेवर
 
 
अनुवाद
भारी बारिश के कारण डाकू पूरी तरह भीग गए और अत्यधिक ठंड से कांपने लगे।
 
Due to heavy rain the bandits got completely drenched and started shivering due to extreme cold.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)