श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 613
 
 
श्लोक  3.5.613 
শিলাবৃষ্টি পডে সব অঙ্গের উপরে
প্রাণ নাহি যায, ভাসে দুঃখের সাগরে
शिलावृष्टि पडे सब अङ्गेर उपरे
प्राण नाहि याय, भासे दुःखेर सागरे
 
 
अनुवाद
उन पर ओले गिरे, फिर भी वे मरे नहीं, बल्कि दुख के सागर में तैरते रहे।
 
Hailstones fell on them, yet they did not die, but continued to float in the ocean of sorrow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)