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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 590
श्लोक
3.5.590
অতএব চল সবে আজি ঘরে যাই
চুপে চাপে দিন দশ বসি’ থাকি ভাই”
अतएव चल सबे आजि घरे याइ
चुपे चापे दिन दश वसि’ थाकि भाइ”
अनुवाद
“तो आओ, हे भाइयो, आज हम सब घर चलें, हम लगभग दस दिन तक चुपचाप प्रतीक्षा करेंगे।”
“So come, brothers, let us all go home today, we will wait quietly for about ten days.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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