श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 584
 
 
श्लोक  3.5.584 
আর কেহ বলে,—“তুমি অবুধ যে ভাই!
যে খায যে পরে সে বা কে-মত গোসাঞি”
आर केह बले,—“तुमि अबुध ये भाइ!
ये खाय ये परे से वा के-मत गोसाञि”
 
 
अनुवाद
किसी और ने कहा, "अरे भाई, तुम तो मूर्ख हो! उनके जैसा खाने-पहनने वाला गोसानी कैसे कहला सकता है?"
 
Someone else said, "Hey brother, you are a fool! How can someone who eats and dresses like him be called a Gosani?"
तात्पर्य
वह कैसे संयमी कहला सकता है जो खूब खाकर, कपड़े और गहने पहनकर शृंगार करता हो?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)