श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 555
 
 
श्लोक  3.5.555 
কেহ বলে,—“মুঞি নিমু রজত নূপুর”
সবে এই মন-কলা খাযেন প্রচুর
केह बले,—“मुञि निमु रजत नूपुर”
सबे एइ मन-कला खायेन प्रचुर
 
 
अनुवाद
किसी ने कहा, “मैं उनकी चाँदी की घुंघरूएँ ले लूँगा।” इस तरह वे सभी उस धन के बारे में स्वप्न देखने लगे जिसकी उन्हें आशा थी।
 
Someone said, "I'll take her silver anklets." So they all began to dream about the riches they hoped for.
तात्पर्य
माना-कला वाक्यांश का अर्थ है "एक स्वप्न में भोगने की इच्छा वाली वस्तु।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)