vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
»
श्लोक 555
श्लोक
3.5.555
কেহ বলে,—“মুঞি নিমু রজত নূপুর”
সবে এই মন-কলা খাযেন প্রচুর
केह बले,—“मुञि निमु रजत नूपुर”
सबे एइ मन-कला खायेन प्रचुर
अनुवाद
किसी ने कहा, “मैं उनकी चाँदी की घुंघरूएँ ले लूँगा।” इस तरह वे सभी उस धन के बारे में स्वप्न देखने लगे जिसकी उन्हें आशा थी।
Someone said, "I'll take her silver anklets." So they all began to dream about the riches they hoped for.
तात्पर्य
माना-कला वाक्यांश का अर्थ है "एक स्वप्न में भोगने की इच्छा वाली वस्तु।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×