श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 549
 
 
श्लोक  3.5.549 
’হৈ হৈ হায হায’ করে কোন জন
কৃষ্ণানন্দে নিদ্রা নাহি সবাই চেতন
’है है हाय हाय’ करे कोन जन
कृष्णानन्दे निद्रा नाहि सबाइ चेतन
 
 
अनुवाद
अन्य लोग चिल्लाये, “हय! हय!” कृष्णभावनामृत के आनंद में कोई भी नहीं सोया।
 
Others cried out, "Hay! Hay!" No one slept in the bliss of Krishna consciousness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)