श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 547
 
 
श्लोक  3.5.547 
কৃষ্ণানন্দে মত্ত নিত্যানন্দ-ভৃত্য-গণ
কেহ করে সিṁহ-নাদ, কেহ বা গর্জন
कृष्णानन्दे मत्त नित्यानन्द-भृत्य-गण
केह करे सिꣳह-नाद, केह वा गर्जन
 
 
अनुवाद
नित्यानन्द के सेवक कृष्णभावनामृत के आनंद में इतने मग्न थे कि उनमें से कुछ सिंह की तरह दहाड़ रहे थे और कुछ गरज रहे थे।
 
Nityananda's servants were so absorbed in the bliss of Krishna consciousness that some of them were roaring like lions and some were thundering.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)