श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 546
 
 
श्लोक  3.5.546 
নিত্যানন্দ প্রভুবর করেন ভোজন
চতুর্-দিকে হরি-নাম লয ভক্ত-গণ
नित्यानन्द प्रभुवर करेन भोजन
चतुर्-दिके हरि-नाम लय भक्त-गण
 
 
अनुवाद
नित्यानंद प्रभु भोजन कर रहे थे और भक्तगण चारों दिशाओं में हरि नाम का कीर्तन कर रहे थे।
 
Nityananda Prabhu was eating food and the devotees were chanting the name of Hari in all four directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)