श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 544
 
 
श्लोक  3.5.544 
খাঙ্ডা ছুরি ত্রিশূল লৈযা জনে জনে
আসিযা বেডিযা নিত্যানন্দ যেই স্থানে
खाङ्डा छुरि त्रिशूल लैया जने जने
आसिया वेडिया नित्यानन्द येइ स्थाने
 
 
अनुवाद
तलवारों, चाकुओं और त्रिशूलों से लैस होकर वे उस घर के पास एकत्र हुए जहाँ नित्यानंद रह रहे थे।
 
Armed with swords, knives and tridents, they gathered near the house where Nityananda was staying.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)