श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.5.54 
যদি কদাচিত্ লক্ষ্মী ও ভিক্ষা করে
তথাপিহ দারিদ্র্য নহিব তোর ঘরে
यदि कदाचित् लक्ष्मी ओ भिक्षा करे
तथापिह दारिद्र्य नहिब तोर घरे
 
 
अनुवाद
“यदि लक्ष्मी को भीख मांगनी पड़े तो भी तुम्हारा घर गरीबी से ग्रस्त नहीं होगा।
 
“Even if Lakshmi has to beg, your house will not be afflicted with poverty.
तात्पर्य
यदि लक्ष्मीदेवी जिसके असीम सामर्थ्य और समृद्धियां हैं गरीबी का सामना करें, तब भी निर्मल परम भक्त श्रीवासा पंडित कभी गरीबी का सामना नहीं करेंगे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)