श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  3.5.52 
এই মাত্র শ্রীবাসের শুনিযা বচন
হুঙ্কার করিযা উঠে শচীর নন্দন
एइ मात्र श्रीवासेर शुनिया वचन
हुङ्कार करिया उठे शचीर नन्दन
 
 
अनुवाद
श्रीवास के वचन सुनते ही शचीपुत्र जोर से गर्जना करके उठ खड़े हुए।
 
On hearing the words of Srivasa, Sachiputra stood up with a loud roar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)