श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 519
 
 
श्लोक  3.5.519 
যে-দিকে চাহেন প্রভুবর নিত্যানন্দ
সেই-দিকে হয কৃষ্ণ-রস মূর্তিমন্ত
ये-दिके चाहेन प्रभुवर नित्यानन्द
सेइ-दिके हय कृष्ण-रस मूर्तिमन्त
 
 
अनुवाद
नित्यानंद प्रभु जिस ओर भी दृष्टि डालते, सभी कृष्ण प्रेम की मधुरिमा से भर जाते।
 
Wherever Nityananda Prabhu looked, everything was filled with the sweetness of Krishna's love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)