श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 518
 
 
श्लोक  3.5.518 
রজত-নূপুর-মল্ল শোভে শ্রী-চরণে
পরম মধুর-ধ্বনি, গজেন্দ্র-গমনে
रजत-नूपुर-मल्ल शोभे श्री-चरणे
परम मधुर-ध्वनि, गजेन्द्र-गमने
 
 
अनुवाद
उनके चरण कमल चांदी के घुंघरू और बाजुओं से सुसज्जित थे, जो हाथियों के राजा की तरह चलते समय मधुर ध्वनि उत्पन्न करते थे।
 
His lotus feet were adorned with silver bells and armlets, which produced melodious sounds when he walked like the king of elephants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)