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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 517
श्लोक
3.5.517
বেত্র, বṁশী, পাচনী জঠর-পটে শোভে
যার দরশন ধ্যান জগ-মনোলোভে
वेत्र, वꣳशी, पाचनी जठर-पटे शोभे
यार दरशन ध्यान जग-मनोलोभे
अनुवाद
उनकी कमर में एक बेंत, एक बाँसुरी और एक बाँस की छड़ी लगी रहती थी। उनके दर्शन या स्मरण मात्र से संसार के सभी लोगों का मन मोहित हो जाता है।
He carried a cane, a flute, and a bamboo stick around his waist. The mere sight or memory of him captivates the hearts of people throughout the world.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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