श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 513
 
 
श्लोक  3.5.513 
সুবর্ণের অঙ্গদ বলয শোভে করে
ন জানি কতেক মালাশোভে কলেবরে
सुवर्णेर अङ्गद बलय शोभे करे
न जानि कतेक मालाशोभे कलेवरे
 
 
अनुवाद
उन्होंने सुन्दर सोने के बाजूबंद और कंगन पहने थे। मुझे नहीं मालूम कि उनके शरीर पर कितनी पुष्प मालाएँ सजी थीं।
 
He wore beautiful gold armlets and bracelets. I don't know how many garlands of flowers adorned his body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)