श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 512
 
 
श्लोक  3.5.512 
কণ্ঠে বহুবিধ মণি-মুক্তা-স্বর্ণ-হার
শ্রুতিমূলে শোভে মুক্তা কাঞ্চন অপার
कण्ठे बहुविध मणि-मुक्ता-स्वर्ण-हार
श्रुतिमूले शोभे मुक्ता काञ्चन अपार
 
 
अनुवाद
उनके गले में रत्नों, मोतियों और सोने से बने अनेक प्रकार के हार थे और उनके कानों में मोतियों से जड़े सोने के कुंडल थे।
 
Around his neck were many kinds of necklaces made of gems, pearls and gold, and in his ears were gold earrings studded with pearls.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)