श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 510
 
 
श्लोक  3.5.510 
পরম মোহন সঙ্কীর্তন-মল্ল-বেশ
দেখিতে সুকৃতি পায আনন্দ-বিশেষ
परम मोहन सङ्कीर्तन-मल्ल-वेश
देखिते सुकृति पाय आनन्द-विशेष
 
 
अनुवाद
संकीर्तन दल के नेता के रूप में उनकी अत्यंत मनमोहक वेशभूषा को देखकर ही धर्मात्मा लोग अत्यन्त संतुष्ट हो जाते थे।
 
The pious people were extremely satisfied just by seeing his extremely attractive attire as the leader of the Sankirtan group.
तात्पर्य
श्री नित्यानंद प्रभु जी के संकीर्तन में उत्साह देखकर धर्मनिष्ठ व्यक्ति अत्यंत प्रसन्न हुए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)