श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 509
 
 
श्लोक  3.5.509 
প্রতি-ঘরে ঘরে সব পারিষদ-সঙ্গে
নিরবধি বিহরেন সঙ্কীর্তন-রঙ্গে
प्रति-घरे घरे सब पारिषद-सङ्गे
निरवधि विहरेन सङ्कीर्तन-रङ्गे
 
 
अनुवाद
वे प्रत्येक घर में अपने सहयोगियों के साथ निरन्तर संकीर्तन का आनन्द लेते थे।
 
He enjoyed continuous Sankirtan with his associates in every house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)