श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 506
 
 
श्लोक  3.5.506 
হেন-মতে নিত্যানন্দ আই সম্ভাষিযা
নবদ্বীপে ভ্রমেন আনন্দ-যুক্ত হৈযা
हेन-मते नित्यानन्द आइ सम्भाषिया
नवद्वीपे भ्रमेन आनन्द-युक्त हैया
 
 
अनुवाद
माता शची से इस प्रकार बात करने के बाद नित्यानंद पूरे नवद्वीप में आनंदपूर्वक विचरण करने लगे।
 
After talking to mother Shachi in this manner, Nityananda started wandering happily throughout Navadvipa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)