श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 498
 
 
श्लोक  3.5.498 
নিত্যানন্দ-স্বরূপেরে দেখি’ শচী-আই
কি আনন্দ পাইলেন—তার অন্ত নাই
नित्यानन्द-स्वरूपेरे देखि’ शची-आइ
कि आनन्द पाइलेन—तार अन्त नाइ
 
 
अनुवाद
नित्यानंद स्वरूप को देखकर माता शची की प्रसन्नता असीम थी।
 
Mother Shachi's happiness after seeing Nityananda Swarup was limitless.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)