श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 497
 
 
श्लोक  3.5.497 
সেই-মতে সর্বাদ্যে আইলা আই-স্থানে
আসি’ নমস্করিলেন আইর চরণে
सेइ-मते सर्वाद्ये आइला आइ-स्थाने
आसि’ नमस्करिलेन आइर चरणे
 
 
अनुवाद
वह सबसे पहले माता शची के घर गए और उनके चरणों में प्रणाम किया।
 
He first went to the house of Mother Shachi and bowed at her feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)