श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ  »  श्लोक 493
 
 
श्लोक  3.5.493 
অদ্বৈতের বাক্য বুঝিবার শক্তি কার?
জানিহ ঈশ্বর-সনে ভেদ নাহি যাঙ্র
अद्वैतेर वाक्य बुझिबार शक्ति कार?
जानिह ईश्वर-सने भेद नाहि याङ्र
 
 
अनुवाद
अद्वैत के शब्दों को समझने की शक्ति किसमें है? वास्तव में, वह परमेश्वर से अभिन्न है।
 
Who has the power to understand the words of Advaita? In reality, he is one with God.
तात्पर्य
चैतन्य चरितामृत, आदि-लीला, अध्याय एक के श्लोक १३ में श्री स्वरूप दामोदर की नोटबुक [और यहाँ भी उद्धृत] से छन्द अद्वैतं हरिणाद्वैतात् का अवलोकन करें।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)