चैतन्य चरितामृत, आदि-लीला, अध्याय एक के श्लोक १३ में श्री स्वरूप दामोदर की नोटबुक [और यहाँ भी उद्धृत] से छन्द अद्वैतं हरिणाद्वैतात् का अवलोकन करें।