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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 49
श्लोक
3.5.49
প্রভু বলে,—“এক দুই তিন যে করি
লাকি অর্থ ইহার বল কেন তালি দিলা?”
प्रभु बले,—“एक दुइ तिन ये करि
लाकि अर्थ इहार बल केन तालि दिला?”
अनुवाद
प्रभु बोले, "इस 'एक, दो, तीन' का क्या मतलब है? तुमने ताली क्यों बजाई?"
The Lord said, "What does this 'one, two, three' mean? Why did you clap?"
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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