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श्लोक 3.5.485  |
যদি তুমি প্রকাশ না কর’ আপনারে
তবে কার শক্তি আছে জানিতে তোমারে? |
यदि तुमि प्रकाश ना कर’ आपनारे
तबे कार शक्ति आछे जानिते तोमारे? |
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| अनुवाद |
| “यदि आप स्वयं को प्रकट नहीं करेंगे, तो आपको जानने की शक्ति किसमें होगी? |
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| “If you do not reveal yourself, who will have the power to know you? |
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