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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
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अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
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श्लोक 480
श्लोक
3.5.480
তুমি সে বুঝাও চৈতন্যের প্রেম-ভক্তি
তুমি সে চৈতন্য-বৃক্ষে ধর পূর্ণ-শক্তি
तुमि से बुझाओ चैतन्येर प्रेम-भक्ति
तुमि से चैतन्य-वृक्षे धर पूर्ण-शक्ति
अनुवाद
"आप परमानंद प्रेम में भगवान चैतन्य की भक्ति का प्रचार करते हैं। आप भगवान चैतन्य के वृक्ष की पूर्णतः सशक्त शाखा हैं।"
"You propagate devotional service to Lord Caitanya in ecstatic love. You are a fully developed branch of the tree of Lord Caitanya."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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