vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 3: अंत्य-खण्ड
»
अध्याय 5: श्री नित्यानंद प्रभु की लीलाएँ
»
श्लोक 470
श्लोक
3.5.470
দেখিযা অদ্বৈত নিত্যানন্দের শ্রী-মুখ
হেন নাহি জানেন জন্মিল কোন সুখ
देखिया अद्वैत नित्यानन्देर श्री-मुख
हेन नाहि जानेन जन्मिल कोन सुख
अनुवाद
जब अद्वैत ने नित्यानंद का चेहरा देखा, तो वह समझ नहीं सका कि वह कितना प्रसन्न हो गया।
When Advaita saw Nityananda's face, he could not understand how happy he became.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×